महाशिवरात्रि : 21 फरवरी- बेंगलुरु आश्रम में

महाशिवरात्रि : 21 फरवरी- बेंगलुरु आश्रम में

🌹स्कंद पुराण के ब्रह्मोत्तर खंड में शिवरात्रि के उपवास तथा जागरण की महिमा का वर्णन है :~

शिवरात्रि का उपवास अत्यंत दुर्लभ है, उसमें भी जागरण करना तो मनुष्यों के लिए और भी दुर्लभ है।

☸लोक में ब्रह्मा आदि देवता और वशिष्ठ आदि मुनि इस चतुर्दशी की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं। इस दिन यदि किसी ने उपवास किया तो उसे सौ 🔥यज्ञों से अधिक पुण्य होता है।

🔮शिवलिंग की चार प्रहरों में चार चीजों से विशेष पूजन करने से बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसा शिवमहापुराण में लिखा है।

इस वर्ष भी यह पूजन बेंगलुरु आश्रम की ओर से रखा गया है, सभी साधक- इस पूजन जागरण (रात्रि-9 बजे से) में आकर महापुण्य कमायें।

1⃣ प्रथम प्रहर- 6:39 pm से 9:45 pm तक

👉🏻 शिवलिंग का दुग्धाभिषेक (देशी गाय के दूध से पूजा)

शिवलिंग पर देशी गाय के दूध अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।

2⃣ द्वितीय प्रहर- 9:46 pm से 12:51 pm तक

👉🏻 देशी गाय के दही से पूजन

शिवलिंग पर दही अर्पित करने से हमें जीवन में हर्ष और उल्लास की प्राप्ति होती है।

3⃣ तृतीय प्रहर- 12:52 am से 3:58 am तक

👉🏻 देशी गाय के घी से पूजन

शिवलिंग पर घी चढ़ाने से हमें तेज की प्राप्ति होती है।

4⃣ चतुर्थ प्रहर- 3:59 am से 7am तक

👉🏻 शहद से पूजन

शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से रूप और सौंदर्य प्राप्त होता है, वाणी में मिठास रहती है, समाज में लोकप्रियता बढ़ती है।

🌀जिसे ऐश्वर्य चाहिए और अपना कल्याण करना है, वो महाशिवरात्रि का इस प्रकार पूजन के साथ उपवास और जागरण करें।

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👉🏻कार्यक्रम के लिए सभी साधक समय⏰ पर उपस्थित रहे।

🏡स्थान~ संत श्री आशारामजी बापू आश्रम, बनशंकरी सेकंड स्टेज, बेंगलुरु।

☎ संपर्क~ 080-50009133

💥 विशेष~ सभी साधक भाई-बहन अवश्य लाभ लें व इस कार्यक्रम की सूचना दूसरे साधकों तक अवश्य पहुँचायें।

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